Mahabharata Pauranik Katha: महाभारत का युद्ध सिर्फ सत्ता का संघर्ष नहीं था, बल्कि यह पारिवारिक रिश्तों के टूटने और बिखरने की एक त्रासदी थी. जहां दुर्योधन और पांडवों की शत्रुता ने कुरुक्षेत्र की भूमि को खून से लाल कर दिया, वहीं युद्ध के बाद कुछ ऐसी घटनाएं भी घटीं जिनका जिक्र अक्सर कम ही सुनने को मिलता है. इन्ही में से एक है- दुर्योधन की पत्नी भानुमती और अर्जुन का विवाह. ऐसे में आइए पुराणों में वर्णित इस दिलचस्प कथा से जानते हैं कि आखिर पति की मृत्यु के बाद अर्जुन की पत्नी भानुमती क्यों बनीं.
Mahabharata Pauranik Katha
कौन थीं भानुमती?
भानुमती काम्बोज के राजा चंद्रवर्मा की पुत्री थीं. वह अत्यंत सुंदर, बुद्धिमानी और वीर महिला थी. वह सिर्फ सौंदर्य की ही धनी नहीं थीं, बल्कि युद्ध कला और कुश्ती में भी निपुण थीं. कहा जाता है कि कई बार वे द्वंद्व युद्ध में दुर्योधन तक को हरा देती थीं. दुर्योधन अपनी पत्नी की इसी बहादुरी और व्यक्तित्व का बहुत बड़ा प्रशंसक था.
अपहरण से विवाह तक का सफर
भानुमती मन ही मन अर्जुन को चाहती थीं और उन्हीं से विवाह करना चाहती थीं. जब राजा चंद्रवर्मा ने अपनी पुत्री का स्वयंवर आयोजित किया, तो अर्जुन किसी कारणवश वहां नहीं पहुंच सके. दुर्योधन, जो भानुमती की सुंदरता पर मोहित था, उसने कर्ण की सहायता से स्वयंवर के बीच से ही भानुमती का बलपूर्वक अपहरण कर लिया और उनसे विवाह किया. भानुमती और दुर्योधन के दो बच्चे थे- पुत्र लक्ष्मण और पुत्री लक्ष्मणा.
इसे अवश्य पढ़ें:- karma in love relationships - आपका प्रेमी आपको क्यों नहीं समझता.....क्या ये कर्म फल है
पुत्री लक्ष्मणा की कहानी
रोचक बात यह है कि जो नियति भानुमती की थी, वही उनकी पुत्री लक्ष्मणा के साथ भी दोहराई गई. दुर्योधन अपनी पुत्री का विवाह कर्ण के पुत्र से करना चाहता था, लेकिन भगवान कृष्ण के पुत्र साम्ब ने लक्ष्मणा का अपहरण कर उनसे विवाह कर लिया. इस प्रकार भानुमती और कृष्ण का परिवार एक रिश्ते में बंध गया.
भानुमती और अर्जुन का विवाह
कुरुक्षेत्र के युद्ध में दुर्योधन और उसके पुत्र लक्ष्मण की मृत्यु हो गई. इसके बाद भानुमती के सामने अपने अस्तित्व और सुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा हो गया. ऐसे में भानुमती ने अर्जुन से विवाह का प्रस्ताव रखा. भानुमती को भय था कि दुर्योधन के वंशज होने के कारण भविष्य में उनके परिवार के साथ दुर्व्यवहार हो सकता है.
अर्जुन से विवाह कर वे अपने कुनबे को पांडवों के संरक्षण में लाना चाहती थीं. कहा जाता है कि भानुमती को अर्जुन से विवाह करने का सुझाव स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने दिया था, ताकि हस्तिनापुर में स्थायी शांति स्थापित हो सके. भानुमती एक दूरदर्शी महिला थीं. वह चाहती थीं कि भविष्य में कौरवों और पांडवों के बचे हुए परिवारों के बीच फिर कभी युद्ध जैसी स्थिति पैदा न हो. कहते हैं कि इस विवाह के बाद ही हिंदी का प्रसिद्ध मुहावरा "कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा" प्रचलित हुआ.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. mangogalaxy.blogspot.com इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
यदि आपको यह दी गयी जानकारी पसंद आई तो इसे अपने दोस्तों, रिश्तेदार एवं Whats App ओर Facebook, Twitter मित्रो के साथ निचे दी गयी बटन के माध्यम से जरूर शेयर करे जिससे वो भी इसके बारे में जान सके.
Read Also,
.jpg)